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Patna News: बिहिया में युवक के लापता होने की जांच अब CBI के हवाले, पटना हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस की जांच पर उठाए सवाल

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Alam Ki Khabar | Patna News | Bihar News | Bhojpur News | बिहिया थाना कांड संख्या 296/2025 में पटना हाईकोर्ट ने जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्य पुलिस की जांच की गति और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए।

पटना, 10 अगस्त। आलम की खबर: भोजपुर के बिहिया में आबकारी पुलिस की कार्रवाई के बाद एक युवक के रहस्यमय ढंग से लापता होने का मामला अब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI के पास जाएगा। पटना हाईकोर्ट ने बिहिया थाना कांड संख्या 296/2025 की जांच तत्काल CBI को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने राज्य पुलिस की जांच के तरीके, उसकी गति और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति अलोक कुमार सिन्हा की खंडपीठ ने माना कि यह ऐसा सामान्य मामला नहीं है, जिसमें जांच को उसी एजेंसी के पास जारी रखा जाए। अदालत के अनुसार, परिस्थितियों ने राज्य की जांच एजेंसी की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि इस मामले में सच्चाई सामने नहीं आती है तो यह न्याय व्यवस्था की गंभीर विफलता होगी।

13 अगस्त 2025 को आखिरी बार परिवार से हुई थी बात

मामला भोजपुर जिले के बिहिया थाना क्षेत्र के गंज निवासी गौरी शंकर राम के बेटे सानोज कुमार के लापता होने से जुड़ा है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, 13 अगस्त 2025 की शाम करीब 6:35 बजे सानोज ने अपने परिवार को फोन किया था।

उसने बताया था कि उसे शराब पीने के आरोप में आबकारी पुलिस ने पकड़ लिया है। बातचीत के दौरान ही फोन कट गया। इसके बाद मोबाइल बंद हो गया और परिवार का उससे संपर्क नहीं हो सका।

परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। अगले दिन बिहिया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि आबकारी पुलिस की हिरासत में सानोज के साथ मारपीट की गई और उसे वाहन से कहीं ले जाया गया।

हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच से ही होगी।

‘भागने’ की कहानी पर कोर्ट को क्यों हुआ संदेह

जांच के दौरान आबकारी पुलिस की ओर से यह दावा किया गया कि हिरासत में लिए गए लोगों में से एक वाहन की डिक्की खोलकर भाग गया था। पुलिस के अनुसार, इसी तरह सानोज के भाग जाने की बात सामने आई।

लेकिन हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े CCTV फुटेज को देखा। अदालत के सामने जिस वाहन की तस्वीर और फुटेज रखी गई, उसे पूरी तरह बंद बोलेरो जैसा वाहन बताया गया। कोर्ट ने माना कि पीछे का दरवाजा खोले बिना उस वाहन से किसी व्यक्ति का कूदकर भाग जाना संभव प्रतीत नहीं होता।

यही बिंदु जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन गया। अदालत ने पुलिस के बयानों में कथित असंगतियों और घटनाक्रम में सामने आए विरोधाभासों को भी गंभीरता से लिया।

मोबाइल फोन ने भी बढ़ाया संदेह

मामले की जांच में सानोज के मोबाइल फोन से जुड़ी जानकारी भी सामने आई। जांच के दौरान उसका एक मोबाइल आबकारी पुलिसकर्मियों के पास से बरामद होने की बात सामने आई।

मोबाइल की लोकेशन को जगदीशपुर आबकारी थाना क्षेत्र से जोड़कर देखा गया। कोर्ट ने इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना कि मोबाइल लंबे समय तक पुलिसकर्मियों के कब्जे में रहा और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को समय पर सुरक्षित करने तथा वैज्ञानिक तरीके से जांचने में देरी हुई।

अदालत ने इसी तरह की परिस्थितियों को देखते हुए राज्य पुलिस की जांच की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया।

करीब एक साल तक नहीं सुलझा मामला

सानोज के लापता होने के बाद परिवार लगातार उसकी तलाश करता रहा। दूसरी ओर, मामले की जांच लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी। अदालत के सामने यह बात भी आई कि जिन आबकारी कर्मियों की भूमिका जांच के दायरे में थी, उनसे समय रहते प्रभावी पूछताछ नहीं की गई।

हाईकोर्ट ने जांच की धीमी गति पर पहले भी नाराजगी जताई थी। अदालत का मानना था कि इतने गंभीर मामले में संदिग्धों से पूछताछ और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए थी।

बाद में मामले में कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग बयान सामने आने की बात भी अदालत के समक्ष रखी गई।

छह संदिग्ध हिरासत में, पूछताछ में सामने आए विरोधाभास

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि सात संदिग्धों में से छह को पुलिस ने हिरासत में लिया है। पूछताछ में यह तथ्य सामने आने की बात कही गई कि सानोज को अन्य लोगों के साथ आबकारी पुलिस ने हिरासत में लिया था।

लेकिन घटनाक्रम को लेकर अधिकारियों के बयान एक-दूसरे से पूरी तरह मेल नहीं खाते थे। इसी कारण अदालत ने यह जानना जरूरी माना कि सानोज वास्तव में मौके से भागा था या उसके साथ कोई दूसरी घटना हुई।

अदालत ने जांच एजेंसी से केवल बयान दर्ज करने के बजाय वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक घटनाक्रम सामने लाने की अपेक्षा की।

परिवार ने दबाव बनाए जाने की बात भी कही

मामले की सुनवाई के दौरान सानोज के पिता ने अदालत के सामने यह भी आरोप लगाया कि केस को दबाने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है।

हाईकोर्ट ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सानोज के पिता और उनके परिवार को सुरक्षा देने का निर्देश दिया। साथ ही दबाव बनाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने को कहा।

महत्वपूर्ण गवाहों की सुरक्षा को लेकर भी अदालत ने निर्देश दिए, ताकि जांच के दौरान किसी प्रकार का भय या दबाव सच्चाई सामने आने में बाधा न बने।

अब CBI करेगी पूरे मामले की जांच

पटना हाईकोर्ट ने अब इस मामले की जांच CBI को सौंप दी है। अदालत ने भोजपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि मामले से संबंधित पूरा रिकॉर्ड एक सप्ताह के भीतर CBI के पटना स्थित एसपी को सौंपा जाए।

इसके बाद CBI मामले की जांच अपने हाथ में लेकर उपलब्ध दस्तावेज, CCTV फुटेज, मोबाइल से संबंधित डिजिटल साक्ष्य, पुलिसकर्मियों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की जांच करेगी।

इस आदेश के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CBI की जांच से सानोज के लापता होने की वास्तविक कहानी सामने आती है या नहीं।

फिलहाल सानोज का कोई पता नहीं चल सका है। परिवार को उम्मीद है कि स्वतंत्र जांच एजेंसी के स्तर पर जांच आगे बढ़ने से मामले की गुत्थी सुलझेगी और घटना की वास्तविकता सामने आएगी।

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न्याय से बड़ी कोई जांच नहीं

बिहिया के इस मामले में सबसे गंभीर सवाल सिर्फ एक युवक के लापता होने का नहीं है, बल्कि यह भी है कि किसी व्यक्ति के पुलिस या आबकारी विभाग की कार्रवाई के बाद गायब होने की स्थिति में जांच कितनी निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से होती है।

ऐसे मामलों में हर घंटे महत्वपूर्ण होता है। CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन, वाहन की स्थिति और मौके पर मौजूद लोगों के बयान जैसे साक्ष्य समय बीतने के साथ कमजोर हो सकते हैं। इसलिए जांच में देरी स्वाभाविक रूप से सवाल पैदा करती है।

पटना हाईकोर्ट का CBI जांच का आदेश इसी गंभीरता को दर्शाता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी अधिकारी को दोषी मान लिया गया है। दोष तय होना जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। लेकिन अदालत का यह कदम जरूर बताता है कि मौजूदा जांच पर उसका भरोसा पर्याप्त नहीं रहा।

अब CBI के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़कर वास्तविकता सामने लाने की है। सानोज का परिवार लंबे समय से जवाब का इंतजार कर रहा है। इस मामले में न्याय तभी पूरा माना जाएगा, जब युवक के साथ वास्तव में क्या हुआ, इसका स्पष्ट और प्रमाणित जवाब सामने आए।

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